
किसी भी विचारवान निवेशक की तरह पब्लिक सेक्टर स्टॉक्स को लेकर मेरा रवैया भी मिला जुला रहा है। इस बात में कोई शक नहीं है कि ऐसे कई पीएसयू स्टॉक हैं जो बतौर बिजनेस बहुत अच्छा कर रहे हैं और ये निवेश करने के लायक भी हैं। वैल्यू रिसर्च में और अपनी प्रीमियम स्टॉक सर्विसेज में हम लगातार पीएसयू स्टॉक्स का विश्लेषण करते रहते हैं और मानकों पर खरे उतरने पर इन स्टॉक्स को रिकमेंड भी करते हैं।
हालांकि मैं आपका बताना चाहता हूं कि पीएसयू में निवेश को लेकर मेरे मन में एक स्पष्ट राय न होने का कारण क्या है। निवेशक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब पीएसयू स्टॉक्स को लेकर कोई विश्लेषण होता है तो सामान्य तौर पर एक अहम बात इसमें नहीं होती है। यह अहम बात है पीएसयू का एक खास तरह का नेचर या उसका वर्क कल्चर।
सरकार भले ही कुछ पीएसयू को बेचने की बात कह रही हो लेकिन निकट भविष्य में ज्यादातर पीएसयू शायद पीएसयू ही रहने जा रहे हैं। हो सकता है कि अर्थव्यवस्था के अच्छे दौर में इनमें से कुछ बहुत अच्छा करें या खराब दौर में गर्त में डूब जाएं। लेकिन इनमें से कुछ पीएसयू का ही सही मायने में निजीकरण होगा। पिछले कुछ समय ये निजीकरण की बात हो रही है और कहा जा रहा है कि सरकार को खराब प्रदर्शन कर रहे पीएसयू से छुटकारा पाना चाहिए। नरेंद्र मोदी ने खुद 2014 आम चुनाव के दौर यह बात कही थी। लेकिन सरकार ने इस बात का समर्थन कभी नहीं किया कि ज्यादातर पीएसयू को बेच दिया जाए। कुल मिला कर सरकार यही करेगी कि बाजार के अच्छे दौर में कुछ पीएसयू में हिस्सेदारी बेच कर अपनी राजकीषीय स्थिति को मजबूत करेगी। यह कुछ इसी तरह का होगा कि कोई प्रमोटर किसी और चीज के लिए पैसे की जरूरत पड़ने पर कंपनी में थोड़ी हिस्सेदारी बेच दे।
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि निकट भविष्य में पीएसयू बदलने नहीं जा रहे हैं। आम तौर पर यह बात सब मानते हैं कि पीएसयू एक संस्थान के तौर पर अपने काम काज से अपने बल बूते आगे बढ़ने वाले संस्थान नहीं हैं। पीएसयू और प्राइवेट सेक्टर के संस्थान के साथ डील करने वाले या उनमें काम करने वाले इस अंतर को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। पीएसयू में काम करने वालों के स्तर पर देखें तो उनमें अच्छा करने की भावना नहीं दिखती है। अगर कोई पीएसयू कारोबार के मोर्चे पर खराब प्रदर्शन कर रहा है तो उनमें मुनाफे को बचा कर और बढ़ा कर शेयरधारकों का पैसा बढ़ाने की वैसी छटपटाहट उनमे नहीं दिखती है जिनती प्राइवेट सेक्टर की कंपनी में दिखती है। और ऐसे में आप इन कंपनियों को चलाने वालों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते क्योंकि मेजर शेयर होल्डर खुद अपने होल्डिंग की वैल्यू बढ़ाने को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है। यही हकीकत है।
पीएसयू कंपनियों को लेकर सरकार का यह रवैया हमें यह भी बताता है कि पीएसयू के स्टॉक में निवेश पूरी तरह से अलग है। आप कंपनी में माइनॉरिटी शेयर होल्डर हैं और मेजॉरिटी शेयर होल्डर का मकसद आपसे पूरी तरह से अलग है। पीएसयू की कारोबारी संभावनाएं एक खास तरह के परिदृश्य पर निर्भर करती हैं। या तो किसी पीएसयू का किसी कारोबार पर एकाधिकार होता है या कोई पीएसयू ऐसा है जो कुछ ऐतिहासिक कारणों से बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है।
वैल्यू रिसर्च के तौर पर हम इन सीमाओं को अच्छी तरह से जानते और समझते हैं और हम इसका फायदा उठाने का भी प्रयास करते हैं। जो लोग पीएसयू स्टॉक्स में निवेश करने की योजना बना रहे हैं उनके लिए संदेश साफ है। आप कोई भी स्टॉक खरीदने से पहले जो रिसर्च करते हैं वह तो करें हीं क्योंकि इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा आपको यह भी देखना चाहिए कि किसी पीएसयू को कौन से खास फायदे मिले हुए हैं और उसके साथ कब तक ये फायदे बने रहेंगे।




