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साल बदले पर नहीं बदला निवेश का नियम

दुनिया बदल गई है लेकिन निवेश के बुनियादी सिद्धांत अब भी भी वही हैं

दुनिया बदल गई है लेकिन निवेश के बुनियादी सिद्धांत अब भी भी वही हैं

जब में पीछे मुड़ कर वैल्‍यू रिसर्च के सफर को देखता हूं तो बहुत कम साल ऐसे नजर आते हैं जो मौजूदा साल जितने उत्‍तेजना से भरे रहे हों। मेरा मतलब प्राचीन चीन में प्रचलित एक शाप से हैं। इस शाप में कहा जाता था कि आप उत्‍तेजना पूर्ण समय में जिएं।

जब में पीछे मुड़ कर वैल्‍यू रिसर्च के सफर को देखता हूं तो बहुत कम साल ऐसे नजर आते हैं जो मौजूदा साल जितने उत्‍तेजना से भरे रहे हों। मेरा मतलब प्राचीन चीन में प्रचलित एक शाप से हैं। इस शाप में कहा जाता था कि आप उत्‍तेजना पूर्ण समय में जिएं।

अब इक्विटी निवेश की बात कर लें। इसके बारे में कभी भी कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हालांकि हम सब लोग जानते हैं कि इक्विटी का जो नेचर है कि इसके बारे में कोई अनुमान लगाना मुश्किल है वहीं इसे निवेश का शानदार विकल्‍प बनाता है। क्‍या यह बात आपको चौंकाती है। नहीं आपको चौंकना नहीं चाहिए। जोखिम और रिटर्न एक साथ चलते हैं। कोई भी ऐसी असेट टाइप के लिए प्रीमियम नहीं चुकाता है जिसके साथ कोई जोखिम न जुड़ा हो। इक्विटी की विविधता ही उसको निवेश के लायक बनाती है। यहां विविधता का मतलब है कि कुछ निवेश बहुत अच्‍छा प्रदर्शन करते हैं और कुछ निवेश बहुत खराब प्रदर्शन करते हैं। निवेशक के लिए सबसे जरूरी है कि वह इक्विटी में अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले निवेश की पहचान करें और खराब प्रदर्शन करने वाले निवेश से दूर रहे। अगर वैल्‍यू रिसर्च सबसे अच्‍छे फिक्‍स्ड डिपॉजिट की पहचान करने वाली सर्विस लॉंच करें तो क्‍या आप इसके लिए हर माह भुगतान करेंगे ? और इससे भी बड़ी बात हम इसके बारे में लिखेंगे क्‍या ?

मैंने स्‍टॉक मार्केट में सबसे बड़ी गिरावट 1991 में देखी थी। यह हर्षद मेहता घोटाले के कारण हुआ था। उस समय से लेकर अगले दशक तक मेरे लिए यह साफ हो गया था कि अगर आपको इक्विटी में रकम बनानी है तो आपको बुरे समय का फायदा उठाना होगा। बुरा समय किसी स्‍टॉक का हो सकता है। किसी सेक्‍टर का हो सकता है या पुरी अर्थव्‍यवस्‍था या दुनिया के लिए बुरा समय हो सकता है। जब मैं बुरे समय की बात करता हूं तो जरूरी नहीं है कि इसका मतलब किसी संकट से हो। मेरा मतलब ऐसे समय से है जब आप किसी स्‍टॉक को उसकी वास्‍तविक कीमत से कम कम में खरीद सकें।

तो जब आप इन सब चीजों पर गौर करते हैं तो यह साफ हो जाता है कि इस संकट को अवसर के तौर पर देखना फायदे का सौदा है। हम लोगों मे से बहुत से लोग ऐसे हैं जो पिछले पांच माह के दौरान अपने निवेश की वैल्‍यू गवां चुके हैं और उनको अपने किसी निवेश या होल्डिंग पर अफसोस भी हो रहा होगा। हालांकि अगर आप इस संकट के दौर में निवेश बनाए नहीं रख पाते हैं तो आपको भविष्‍य में इससे भी बड़े अफसोस का सामना करना पड़ सकता है।

अगर बुरा समय एक अवसर है तो अगले कुछ माह अवसर के लिहाज से बहुत बड़े साबित होने वाले हैं। ऐसे मौके निवेश के लिहाज से कभी कभी ही आते हैं।

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