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म्यूचुअल फंड निवेश एक्सपर्ट कैसे बनें? पार्ट-4: स्पीड-ब्रेकर से बचना सीखें!

ये हमारी 7-पार्ट की सीरीज़ का चौथा पार्ट है. इस पार्ट में हम फ़ाइनेंशियल गोल को समय पर हासिल करने का फ़ॉर्मूला बता रहे हैं.

ये हमारी 7-पार्ट की सीरीज़ का चौथा पार्ट है. इस पार्ट में हम फ़ाइनेंशियल गोल को समय पर हासिल करने का फ़ॉर्मूला बता रहे हैं.

सोचिए, आपकी ज़िंदगी एक हाईवे है और आपके फ़ाइनेंशियल गोल वो मंज़िल जहां आपको समय पर पहुंचना है. पर अगर बीच में बड़ा स्पीड-ब्रेकर आ जाए तो? आइए, विस्तार से समझते हैं कि कैसे इन फ़ाइनेंशियल रुकावटों से कैसे बचा जाए और अपनी रफ़्तार बनाए रखी जाए.

समझदारी से तय करें अपने फ़ाइनेंशियल गोल

हमारी ज़िंदगी में ज़रूरतों की लिस्ट कभी ख़त्म नहीं होती. ठीक इसी तरह, कुछ फ़ाइनेंशियल गोल्स जैसे बच्चों की एजुकेशन या रिटायरमेंट, को टाला नहीं जा सकता. बच्चों का स्कूल एडमिशन या रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं होती, ये चीज़ें तय हैं. आप ये नहीं कह सकते कि बच्चों के स्कूल एडमिशन को पैसे की कमी की वजह से कुछ साल के लिए टाल देते हैं, या रिटायरमेंट के लिए कुछ और साल काम करने का वक्त लें. दूसरी तरफ़, घर ख़रीदना, कार लेना या छुट्टियों में विदेश घूमने जाना, ये सभी चीज़ें थोड़ा इंतज़ार कर सकती हैं. इन 'नो-कॉम्प्रोमाइज़' वाले गोल्स को समझदारी से तय करना आपकी पहली ज़िम्मेदारी है. इन्हें पहचानने से ही सही बचत होगी.

हाईवे पर स्पीड-ब्रेकर से सावधान!

जब आप लंबे समय के लिए फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करते हैं, तो एक चीज़ हमेशा दिमाग में होनी चाहिए "अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?" मान लीजिए, मार्केट उस वक्त गिर जाए जब आपको पैसों की ज़रूरत है. जैसे मार्च 2020 में कोविड-19 के चलते स्टॉक मार्केट क्रैश हुआ था. उन निवेशकों के प्लान, जो उस वक्त रिटर्न की उम्मीद कर रहे थे, उनकी आशाओं पर पानी फिर गया था. ये बिल्कुल हाईवे पर अचानक बड़ा स्पीड-ब्रेकर आने जैसा है.

इन स्पीड-ब्रेकर से बचने के लिए, आपको प्लानिंग में एक सेफ़्टी वॉल्व जोड़ने की ज़रूरत है. अगर अचानक कोई इमरजेंसी आ जाए, तो आपके पास एक बैकअप होना चाहिए.

अपने प्लान में सेफ़्टी वॉल्व कैसे जोड़ें?

सेफ़्टी वॉल्व यानी एक्स्ट्रा तैयारी, जो आपको मुश्किल वक्त में भी रिलैक्स रखे. यानि, निवेश करते समय आप रिटर्न का अनुमान थोड़ा कम रखें और अगर हो सके तो अपने प्लान को शुरू करने का वक्त भी थोड़ा पहले से रखें. ताकि अचानक मार्केट गिरने पर भी आपकी नींद ख़राब न हो.

रिटर्न का रेट कम मानें: SIP करते वक्त 12% की जगह 10.5% रिटर्न मानें.

एक या दो साल पहले तैयारी शुरू करें: पैसे की ज़रूरत से पहले ही निवेश ख़त्म कर लें.

एक मिसाल: कॉलेज फ़ीस की तैयारी

मान लीजिए, आपके बच्चे के कॉलेज के लिए 10 साल बाद ₹20 लाख की ज़रूरत है. आप अपनी SIP प्लानिंग करते वक्त 12% रिटर्न का अनुमान लगाते हैं और ₹9,000/महीना बचाने का फ़ैसला लेते हैं. लेकिन, क्या होगा अगर दसवें साल के आसपास मार्केट गिर जाए? उस स्थिति से बचने के लिए आपको प्लान को थोड़ा बदलना होगा. रिटर्न का उम्मीद थोड़ा घटाकर, जैसे 10.5% कर सकते हैं, और निवेश को एक साल पहले भी शुरू कर सकते हैं. इस तरह, आपको हर महीने ₹11,500 की बचत करनी पड़ेगी. अगर मार्केट में कोई उतार-चढ़ाव आता है, तो आपके पास सेफ़्टी नेट के रूप में ₹5.5 लाख का एक्स्ट्रा फ़ंड होगा, जो आपको मानसिक शांति देगा और निवेश में किसी भी गड़बड़ी को झेलने की ताक़त देगा.

म्यूचुअल फ़ंड निवेश के एक्सपर्ट कैसे बनें सीरीज़ के बाक़ी पार्ट्स यहां पढ़िए.

पार्ट 1 - म्यूचुअल फ़ंड के एक्सपर्ट निवेशक कैसे बनें?

पार्ट 2 - नतीजे की समझ के साथ शुरुआत करें

पार्ट 3 - निवेश को रीबैलेंस करना ज़रूरी है

पार्ट 5 - रिवर्स गियर को मत भूलिए

पार्ट 6 - फ़ंड के चुनाव कैसे करना चाहिए?

पार्ट 7 - एक संत की तरह शांत रहें

ये लेख पहली बार दिसंबर 28, 2021 को पब्लिश हुआ, और जनवरी 07, 2025 को अपडेट किया गया.

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