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बफ़ेट का लेटेस्‍ट एनुअल लेटर आ गया है और यह कतई निराश नहीं करता

बफ़ेट का लेटेस्‍ट एनुअल लेटर आ गया है और यह कतई निराश नहीं करता

क्‍या सालाना रस्‍म अब बंद हो रही है? यहां मैं वारेन बफ़ेट के एनुअल लेटर की बात कर रहा हूं, जो 1977 से इस समय के आस-पास आ रहा है। बर्कशायर हैथवे के शेयर होल्‍डर्स के लिए जारी होने वाला बफ़ेट का एनुअल लेटर एक अहम एनुअल एपि‍सोड है, और सिर्फ़ उन शेयर होल्‍डर्स के लिए नहीं है। निवेश और बिजनेस में दिलचस्‍पी रखने वाला कोई भी व्‍यक्ति आम तौर पर इसे पढ़ना पसंद करता है।
अधिकतर कंपनियों के चेयरमैन के एनुअल लेटर कॉरपोरेट की बोर करने वाली भाषा में लिपटे पीआर एक्‍सरसाइज हैं। वहीं, बफ़ेट अपनी बेबाक टिप्‍पणियों के लिए जाने जाते हैं। उनकी टिप्‍पणियां किसी भी बात पर हो सकती हैं, जिस पर वे बोलना चाहते हैं। एक आम कॉरपोरेट कम्‍युनिकेशन और लेटर की तरह आम शेयर होल्‍डर्स की सालाना बैठक भी बोरियत और नीरसता से भरी होती है, इसके उलट बफ़ेट की कंपनी की एनुअल मीट में उत्‍सव जैसा माहौल रहता है। यह एनुअल मीट ओमाहा, नेबरास्‍का में होती है।

इस साल का लेटर पिछले कई लेटर से थोड़ा अलग है। बफ़ेट बाहर की दुनिया के बारे में कुछ नहीं कहते। वे बिटकॉइन या वाल स्‍ट्रीट या हेज फ़ंड या ऐसी किसी चीज पर कोई कड़ी बात नहीं कहते हैं, जिससे वे नफ़रत करते हैं। इसके बजाए, लेटर बर्कशायर के बारे में है। पहली नजर में, ऐसा लगता है कि अगर कोई बर्कशायर का शेयर होल्‍डर नहीं है तो उसकी दिलचस्‍पी के लिए लेटर में कुछ नहीं है।
हालांकि लेटर को गौर से पढ़ने पर इसमें आपको और भी बहुत कुछ दिखेगा। बफ़ेट और मंगर को हमेशा से ऐसी कंपनियां पर भरोसा रहा है, जो कुछ करती हैं न कि सिर्फ रक़म निवेश करती हैं। इस साल के लेटर में, बफ़ेट ने ‘सरप्राइज, सरप्राइज’ नाम से एक सेक्‍शन दिया है। सेक्‍शन में कहा गया है: बहुत‍से लोग बर्कशायर को फ़ाइनेंशियल असेट्स का बड़ा और अजीब कलेक्‍शन मानते हैं। सच यह है कि बर्कशायर दूसरे अमेरिकी कॉरपोरेशन की तुलना में अधिक अमेरिका बेस्‍ड ‘इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर’ असेट की मालिक है और ऑपरेट करती है। इस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को हमारी बैलेंस शीट पर प्रॉपर्टी, प्‍लांट और इक्विपमेंट के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है। यह अधिपत्‍य हमारा गोल कभी नहीं रहा। हालांकि, यह एक तथ्‍य बन गया है। वर्ष के अंत में बर्कशायर की बैलेंस शीट में दिखाए गए घरेलू इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर असेट 158 अरब डॉलर के थे। पिछले साल यह आंकड़ा बढ़ गया है और यह आगे भी बढ़ता रहेगा। बर्कशायर हमेशा आगे बढ़ती रहेगी।

यह काफ़ी चौंकाने वाला है। ऐसे समय में, जब बहुत सारी कंपनियों की प्रमुख गतिविधियां फाइनेंशियल इंजीनियरिंग के अलावा कुछ नहीं दिख रही हैं, यह इस बात को नए सिरे से स्‍थापित करता है कि बिजनेस क्‍या है- उत्‍पादक चीजें करना, जो अच्‍छा मुनाफा देने के साथ अधिक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। यह इक्विटी निवेश कैसे काम करता है, उसके सबसे बेसिक-और वास्‍तविक नजरिए के साथ भी जुड़ता है। आपके ‘शेयर्स’की वैल्‍यू बढ़ती है क्‍योंकि अर्थव्‍यवस्‍था ग्रो करती है, अच्‍छी कंपनियां अधिक रक़म बनाती हैं और अगर आपने इनमें निवेश किया है, तो आप समय के साथ बड़ी रक़म बनाते हैं।

कुछ साल पहले शेयर होल्‍डर्स को अपने एजुअल लेटर में, वारेन बफ़ेट ने कहा था कि उनकी सफ़लता का एक बड़ा हिस्‍सा ‘द अमेरिकन टेलविंड’ की वजह से है। दशकों तक उन्‍होंने रक़म बनाई, उसकी बुनियादी वजह यह थी कि अमेरिका की अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से बढ़ रही थी, बाकी सब डिटेल है। आपके और मेरे लिए, निवेश के ज़रिए रक़म बनाने का सबसे अच्‍छी तरीका अपने बिजनेस और जॉब के साथ अपने निवेश में भारतीय टेलविंड को पकड़ना है। बिजनेस की बुनियादी चीजें बहुत मायने रखती हैं। और अगर ये खराब हैं तो कोई भी चमत्‍कार नहीं कर सकता। लेकिन इसका उलटा भी उतना ही सच है।

काफ़ी समय हो गया, वास्‍तव में 42 साल पहले, 1980 के लेटर में बफ़ेट ने लिखा था, “हमारा निष्‍कर्ष है कि कुछ उम्‍मीदों के साथ जब बेहतरीन प्रदर्शन की साख वाला मैनेजमेंट कमजोर फ़ंडामेंटल इकोनॉमिक्‍स की साख वाला बिजनेस संभालता है, तो बिजनेस की साख बनी रहती है”। मॉडर्न बिजनेस ऐसे उदाहरण से भरे पड़े हैं। सकारात्‍मक माहौल में लगातार अर्निंग पावर वाले अच्‍छे बिजनेस ही वह चीज है जिसकी आपको ज़रूरत है।

ट्रिक कितनी भी स्‍मार्ट लग रही है, यह काम नहीं करती। हाल के महीनों और वर्षों की खबरें इसका सबूत हैं।

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