फ़र्स्ट पेज

इंश्योरेंस की सबसे पुरानी समस्या

इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने नई एजुकेशनल वेबसाईट लॉन्च की है, मगर ये उसी पुरानी समस्या से ग्रस्त लगती है।

इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने नई एजुकेशनल वेबसाईट लॉन्च की है, मगर ये उसी पुरानी समस्या से ग्रस्त लगती है।

‘सबसे पहले लाईफ़ इंश्योरेंस’ के विज्ञापन आपने देखे होंगे। ये विज्ञापन और वेबसाईट इंश्योरेंस इंडस्ट्री की सामूहिक कोशिश है। इस कैंपेन का सीधा-सीधा मक़सद ‘सबसे पहले’ लाईफ़ इंश्योरेंस की बात लोगों को बताना, और इस विषय पर जानकारी देना, और साथ ही इस विषय को लेकर सवालों के जवाब (FAQs) देना है। ये एक अच्छा मक़सद है।

इसका उद्देश्य सराहनीय है। लाईफ़ इंश्योरेंस ‘सबसे पहले’ ही होना चाहिए। जब भी कोई शख़्स अपने कामकाजी जीवन की शुरुआत करे, और कोई दूसरा उसपर आर्थिक तौर पर निर्भर हो, तो इस विषय को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए कि किसी की मृत्यु होने पर, उसपर निर्भर व्यक्ति के ख़र्चों के लिए उसे धन मिल सके। पर्सनल फ़ाईनांस की ये समझ में आने वाली सरल सी बात है, या कम-से-कम सरल होनी चाहिए।

हालांकि, ‘सबसे पहले लाईफ़ इंश्योरेंस’ की वेबसाईट, फ़ाईनेंशियल गोल समझाते-समझाते अजीबोग़रीब तरह से भटक जाती है, और अंत में, ये बताना ही मुश्किल हो जाता है कि यहां किसके आर्थिक हित साधे जा रहे हैं।

इस मुश्किल को समझना आसान है। वेबसाईट ये पक्का करने में काफ़ी सतर्क दिखाई देती है कि जो व्यक्ति वेबसाईट पर आया है वो इस बात को जान ही नहीं पाए कि टर्म इंश्योरेंस का कॉन्सेप्ट क्या है। आपको टर्म इंश्योरेंस का शब्द इस वेबसाईट की ‘ग्लोसरी’ या शब्दकोष के एक वाक्य में वहां दबा हुआ मिलेगा, जहां ‘नॉन-पार्टिसिपेटिंग’ प्लान का मतलब समझाया गया है।

आईए ग़ौर करते हैं कि ‘टर्म इंश्योरेंस’ की मौजूदगी छुपाना एक समस्या क्यों कहलाएगी। इंश्योरेंस का शब्दकोष में मतलब कुछ इस तरह से है: ऐसी व्यवस्था जिसमें कोई कंपनी या राज्य ख़ास तरह की हानि, नुकसान, बीमारी या मृत्यु होने पर तयशुदा प्रीमियम के एवज़ में हर्जाने के तौर पर भरपाई की गांरटी देता है। लाईफ़ इंश्योरेंस के विषय में हम इसे और भी सरल कर सकते हैं कि: ऐसी व्यवस्था जिसके तहत मृत्यु हो जाने पर, एक कंपनी ख़ास प्रीमियम की एवज में आश्रितों को हर्जाना देगी।

नोट करें कि ये धन के निवेश से बिल्कुल अलग क़िस्म की बात है। जिस तरह का धन आपकी असमय मृत्यु के बाद आपके परिवार को चाहिए, वो उस निवेश के मुक़ाबले बिल्कुल अलग स्तर पर होता है जो निवेश आप कर रहे हैं या जहां निवेश कर रहे हैं। आमतौर पर, जब लोग कमाना शुरु करते हैं और असमय मृत्यु हो जाने पर आश्रितों के लिए जिस तरह के धन की व्यवस्था करना चाहते हैं, उसकी ज़रूरत बहुत ज़्यादा होती है पर तब उनके पास निवेश करने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं बचता। बाद के जीवन में, ये स्थिति बदलती है और उन्हें दोनों की (निवेश और इंश्योरेंस) ज़रूरत होती है। इसके बहुत बाद, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं और आत्मनिर्भर हो जाते हैं, तब ये स्थिति पूरी तरह से निवेश तक ही सीमित हो जाती है। असल में, एक बेहतर आर्थिक जीवन के लिए, इंश्योरेंस और निवेश को अलग तरह से प्लान करना बेहद ज़रूरी है। इन दोनों को जोड़ने के नतीजे ख़राब ही होते हैं।

सही फ़ैसलों के लिए, लाईफ़ इंश्योरेंस को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए, मगर ये टर्म इंश्योरेंस होना चाहिए। ये हमें एक असहज करने वाले सवाल पर ला देता है: ‘सबसे पहले लाईफ़ इंश्योरेंस’ कैंपेन, टर्म इंश्योरेंस को पूरी तरह से छुपाने के लिए इतनी मेहनत करने में क्यों जुटी है? आख़िरकार, दो दर्जन इंश्योरेंस कंपनियों में से हर कोई जो इंडस्ट्री का हिस्सा है, उसके पास टर्म इंश्योरेंस मौजूद है, इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) में इसे लेकर विस्तृत नियम हैं जिनसे टर्म इंश्योरेंस पॉलिसियों के स्वरूप और कामकाज के तरीक़े तय होते हैं। जब कोई भी ये नहीं कह सकता कि इसका अस्तित्व नहीं है, तो ऐसा जताने की कोशिश क्यों की जाए?

क्या आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि टर्म इंश्योरेंस का विकल्प छुपाने की ज़रूरत क्यों है? क्या मेरा कोई पाठक इसका अंदाज़ा लगा सकता है? क्या कोई इंश्योरेंस इंडस्ट्री का व्यक्ति इसे लेकर दिख रही हिचकिचाहट के बारे में समझा सकता है? शायद IRDA में से कोई इस गुत्थी को सुलझा सके?

असल में, मुझे यक़ीन है कि हर कोई इसका जवाब जानता है। ये एक तथ्य है कि टर्म इंश्योरेंस ही लोगों के लिए ‘सबसे पहले’ इंश्योरेंस का, सबसे बेहतर विकल्प है। मगर इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए और इंश्योरेंस बेचने वालों के लिए ये कहीं कम फ़ायदे का सौदा है। टर्म इंश्योरेंस लाईफ़ कवर पाने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे सस्ता ज़रिया है। इसमें कोई शक़ की गुंजाईश ही नहीं है। क्योंकि ये सबसे सस्ता है, इसीलिए ये इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए सबसे कम फ़ायदेमंद भी है।

टर्म इंश्योरेंस में उस तरह का पैसा नहीं बनाया जा सकता, जिस तरह का पैसा यूलिप और एंडॉमेंट प्लान में बनता है, और यही वो प्लान हैं जिन्हें इंडस्ट्री की कैंपेन प्रमोट करती है। असल में, इस वेबसाईट के तथाकथित ‘नॉलिज सेंटर’ में, एक आर्टिकल है ‘एंडॉमेंट प्लान और यूलिप - फ़र्क जानिए’। ये इस वेबसाईट का इकलौता हिस्सा है जहां असल में किसी पॉलिसी की चर्चा की गई है पर सबसे अहम टाईप की पॉलिसी की चर्चा को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया है!

कुल मिला कर, एक युवा भारतीय जिसने अभी-अभी कमाना शुरु ही किया हो और इंश्योरेंस लेना चाहता हो, उसके लिए इस ‘सबसे पहले’ वेबसाईट पर जाना नुकसान की बात होगी। अगर आप इस पर पहुंचते हैं, तो बेहतर होगा कि आप इंश्योरेंस पाने के ज़्यादा मंहगे तरीक़ों को कस्टमरों को बेचने की इन कोशिशों को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ करें।

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

इतना लंबा सफ़र

पढ़ने का समय 3 मिनटधीरेंद्र कुमार down-arrow-icon

विरासत में मिला NPS टैक्स फ़्री, लेकिन म्यूचुअल फ़ंड पर लगता है

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

Kaynes Technology का शेयर अपने पीक से 61% गिरा, क्या करें निवेशक?

पढ़ने का समय 6 मिनटसत्यजीत सेन

NPS की एकमुश्त रक़म को 25 साल की रिटायरमेंट इनकम में कैसे बदलें?

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

इस क्रैश में सबसे कम गिरने वाले 5 लार्ज-कैप फ़ंड

पढ़ने का समय 3 मिनटहर्षिता सिंह

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

जब शब्दों को आख़िरकार धार मिल सकती है

जब शब्दों को आख़िरकार धार मिल सकती है

RBI के नए मिस-सेलिंग नियम एक मोड़ साब़ित हो सकते हैं - अगर सख़्ती से लागू हों

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी