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इंटरनेशन फ़ंड्स में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को वैश्विक गिरावट से डरना नहीं चाहिए

इंटरनेशन फ़ंड्स में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को वैश्विक गिरावट से डरना नहीं चाहिए

वो भारतीय चिंतित हैं जिन्होंने इंटरनेशनल फ़ंड्स में निवेश किया है, और इसकी वजह भी है। सिवाय उनको छोड़ कर जो अपने इक्विटी निवेश में ग्लोबल स्तर पर डाइवर्सिफ़िकेशन पर ध्यान देते हैं, जब मैं इंटरनेशनल फ़ंड्स कहता हूं, तो मेरा मतलब उन भारतीय म्यूचुअल फ़ंड्स से है जो दुनिया भर में निवेश करते हैं। भारतीय बचतकर्ताओं की आश्चर्यजनक रूप से बड़ी संख्या निवेश के इस विकल्प के बारे में जानती ही नहीं है।
कुछ भी हो, चिंता के विषय पर हम वापस लौटते हैं। इस बात को अब छः महीने हो चले हैं, जब भारतीय बाज़ार का व्यवहार, ग्लोबल बाज़ार से अलग रहा है। अगर हम ख़ासतौर पर यूएस से तुलना करें—जो कि सही तुलना होगी क्योंकि हमारे ज़्यादातर इंटरनेशनल फ़ंड्स यूएस पर फ़ोकस करते हैं—तो अप्रैल 1 से अक्टूबर 25 तक, सेंसेक्स फ़्लैट रहा है। इसके उलट,S&P 500 15.6प्रतिशत नीचे गया है, औरNASDAQ100 25प्रतिशत नीचे गया है। ये एक बड़ा फ़र्क़ है। भारतीय मार्केट, बुरे-से-बुरे, स्थिरता की शिक़ायत ही कर सकते हैं। सापेक्षता रूप से, उन्होंने बहुत अच्छा ही किया है। पर हां, सभी तरह के भारतीय इक्विटी मार्केट ने अच्छा नहीं किया है ऐसा नहीं है, मगर आप अगर सभी भारतीय डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स के प्रदर्शन का सार देखें तो आपको पता चलेगा कि 400 फ़ंड्स में से, केवल 30 फ़ंड्स ने ही पिछले छः महीने में नकारात्मक नतीजे दिए हैं और 300 से ज़्यादा फ़ंड्स ने 4 प्रतिशत रिटर्न से ज़्यादा दिया है, और ये उन छः महीनों के उतार-चढ़ाव/ठहराव वाले छः महीनों के लिए है जिसमें हर तरह का ग्लोबल क्राइसिस शामिल रहा है, इस लिहाज़ से उनका प्रदर्शन काफ़ी अच्छा ही कहा जाएगा।
इंटरनेशनल फ़ंड काफ़ी अलग तस्वीर पेश करते हैं। जहां वो संख्या में बहुत कम हैं और अपने स्वरूप में एक दूसरे से इतने अलग हैं कि मोटे तौर पर किसी ट्रेंड का पता नहीं चलता, पर ये ज़रूर है कि क़रीब-क़रीब सभी काफ़ी ज़ोरदार तरीक़े से नकारात्मक हैं, और इसी अवधि में यूएस पर फ़ोकस करने वाले फ़ंड्स का नुक़सान 7 प्रतिशत से 15 प्रतिशत की रेंज में रहा है। मगर हां, ये कहने की ज़रूरत नहीं कि ये अवधि किसी चिंता का कारण बनने के लिए बहुत कम है। हालांकि, जिन निवेशकों ने इंटरनेशल फ़ंड्स में निवेश शुरू किया है। क्या ये एक सामान्य बदलाव है? या प्रलय की भविष्यवाणी करने वाले सही हैं? पश्चिम से प्रभावित मीडिया और सोशल मीडिया पर, काफ़ी लोग हैं जिनके तर्क ठोस लगते हैं कि इन देशों के स्टॉक्स शायद लंबी गिरावट के दौर में जाने वाले हैं, शायद वैसा ही जैसा जापान के साथ दशकों तक हुआ। एक भारतीय निवेशक को इसके लिए कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए?
मेरी नज़र में, उन्हें विदेशी निवेश को लेकर आशावादी होना चाहिए। जब मैं 75 या ऐसे ही इंटरनेशनल फ़ंड्स में लगी असल रक़म को देखता हूं, तो उनमें कुल ₹36,000 करोड़ के एसेट लगे हैं, जिनमें से क़रीब ₹28,000 करोड़ मेनस्ट्रीम यूएस कंपनियों में निवेशित हैं। जहां ये कंपनियां बिनज़स करती हैं और अपना मुनाफ़ा कमाती हैं, उस लिहाज़ से ये यूएस कंपनियां न हो कर ग्लोबल कंपनियां हैं। इससे भी बड़ी बात है कि ज़्यादातर ग्लोबल टेक कंपनियों के तौर पर डिफ़ाइन की जाती हैं।
पर हां, टेक शब्द को अब बंधी हुई परिभाषा में रख पाना मुश्किल हो गया है। सभी कुछ टेक है। हालांकि, मैं मानता हूं कि हम भी इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट, एप्पल, अमेज़न, सेल्सफ़ोर्स, क्लाउडफ्लेयर और कुछ और दूसरों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा बुनियादी स्तर पर ‘टेक’ हैं। नोट करें कि हमने इसमें ट्विटर, मेटा या नेटफ़्लिक्स को शामिल नहीं किया है। कारण ये है कि ये कंपनियां टेक का इस्तेमाल अपने लिए करती हैं, वहीं पहले वाली लिस्ट की कंपनियां टेक क्रिएट करती हैं, जो कि दुनिया भर के इंफ्रास्ट्रक्चर की बुनियाद का काम कर रहा है। नोट करें कि इस संदर्भ में,जब मैं अमेज़न कहता हूं तो मेरा मतलब अमेज़न वेब सर्विस (AWS) बिज़नस से है। आज, भले ही इन टेक कंपनियों के कुछ ख़राब महीने गुज़रे हों और इसमें शक़ नहीं कि कुछ और भी हों।
जब मैं ये पेज लिख रहा हूं, तो गूगल और माइक्रोसॉफ़्ट के तिमाही नतीजों की ख़बर आ गई है; दोनों में ही ट्रेडिंग के बाद के घंटों में 5-6 प्रतिशत गिरावट आई है। अमेज़न एक-दो दिनों में आएगा, मगर स्टॉक के दाम अभी से गिरने शुरू हो गए हैं। कुछ हफ़्तों या महीनों के बाद ये मायने नहीं रखता। ध्यान रहे—आने वाले सालों में असल नाम बदल सकते हैं। आख़िर ये एक मशहूर उतार-चढ़ाव से भरा सेक्टर है।
हालांकि, एक भारतीय इक्विटी इन्वेस्टर के तौर पर, अपने इक्विटी एक्सपोज़र के एक हिस्से का इस तरह का डाइवर्सिफ़िकेशन एक ज़रूरी हिस्सा है। जहां तक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स का ताल्लुक़ है, इंटरनेशनल इन्वेस्टिंग ग्‍लोबल टेक लीडर कंपनियों एक चैनल है,जिसे आपको गंवाना नहीं चाहिए।

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