बड़े सवाल

शेयर ट्रांसफ़र करने पर टैक्स कैसे लगता है?

शेयर ट्रांसफ़र करते समय कुछ बातों का ख़ास ध्यान नहीं रखा तो चुकाना पड़ सकता है ज़्यादा टैक्स

शेयर ट्रांसफ़र करते समय कुछ बातों का ख़ास ध्यान नहीं रखा तो चुकाना पड़ सकता है ज़्यादा टैक्स

हाल ही में, हमारे एक सब्सक्राइबर ने शेयर ट्रांसफ़र करने के बारे में पूछा. उनका सवाल था, "अगर मैं अपने जीवन साथी को शेयर ट्रांसफ़र करता हूं तो इस पर कितना टैक्स लगेगा? अगर जीवन साथी शेयर नहीं बेचता है, तो क्या उन्हें टैक्स देना होगा? अगर ये लॉन्ग-टर्म के लिए हैं, तो इसके ट्रांसफ़र के बाद इसे लॉन्ग-टर्म कब माना जाएगा?"

सबसे पहली बात तो ये कि आप दो तरीक़ों से अपने जीवनसाथी या किसी और को शेयर ट्रांस़फर कर सकते हैं. या तो आप वसीयत/ उत्तराधिकार के ज़रिए शेयर ट्रांसफ़र कर सकते हैं, या आप उन्हें गिफ़्ट कर सकते हैं.

ट्रांसफ़र का प्रोसेस आसान है. इसके लिए बस ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन और ट्रांसफ़र फ़ीस के साथ 18 फ़ीसदी GST लगता है. हालांकि, ट्रांसफ़र फ़ीस ब्रोकर के लिए अलग-अलग हो सकती है.

दरअसल, इस तरह के ट्रांसफ़र पर लगने वाले टैक्स का असर ख़ासा अहम हो सकता है. ट्रांसफ़र होने वाले शेयरों पर लगने वाला टैक्स तीन अहम फ़ैक्टर पर निर्भर होता है.

  • ट्रांसफ़र का तरीक़ा
  • होल्डिंग पीरियड
  • एक्विज़िशन की लागत

चलिए, इन सभी बातों को अलग-अलग तरीक़ों से समझते हैं.

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ट्रांसफ़र का तरीक़ा
गिफ़्ट किए गए शेयरों पर टैक्स इस बात से तय होता है कि ये वसीयत/ उत्तराधिकार के रूप में या गिफ़्ट के रूप में मिले हैं. इसके अलावा, ये इस बात से भी तय होता है कि शेयर किसको ट्रांसफ़र किए गए हैं. आइए तीन संभावनाओं पर नज़र डालते हैं.

  • वसीयत या उत्तराधिकार के तौर पर ट्रांसफ़र करना.
  • इस स्थिति में, कोई टैक्स नहीं लगता, भले ही हासिल करने वाला रिश्तेदार हो या नहीं.
  • किसी ग़ैर-रिश्तेदार को गिफ़्ट के तौर पर ट्रांसफ़र करना.
  • इस स्थिति में, अगर एक साल में ट्रांसफ़र होने वाले शेयरों की कुल क़ीमत ₹50,000 से ज़्यादा है, तो पाने वाले को टैक्स देना पड़ता है.
  • किसी रिश्तेदार को गिफ़्ट के तौर पर ट्रांसफ़र करना.
  • इस मामले में कोई टैक्स नहीं लगता है, लेकिन 'रिश्तेदार' की परिभाषा काफ़ी बड़ी है और इसमें नीचे दिए गए लोगों को शामिल किया गया है:
    • आपका जीवनसाथी
    • आपके भाई-बहन और उनके जीवनसाथी
    • आपके जीवनसाथी के भाई-बहन और उनके जीवनसाथी
    • आपके माता-पिता के भाई-बहन और उनके जीवनसाथी
    • आपके दादा-परदादा, साथ ही उनके जीवनसाथी
    • आपके जीवनसाथी के दादा-परदादा, साथ ही उनके जीवनसाथी

होल्डिंग पीरियड
इसके बाद होल्डिंग पीरियड की बात आती है.

लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म के शेयरों पर अलग-अलग टैक्स लगता है. इसके अलावा, अगर आप अपने स्टॉक किसी रिश्तेदार को ट्रांसफर करते हैं, तो उन पर तभी टैक्स बनता है जब आपका रिश्तेदार शेयर बेचता है.

कुल होल्डिंग पीरियड से ये तय होता है कि प्रॉफ़िट लॉन्ग टर्म है या शॉर्ट टर्म. ये वही पीरियड है जिसमें आप शेयरों को अपने रिश्तेदार को ट्रांसफर करने से पहले अपने पास रखते हैं, साथ ही वो पीरियड है जिस दौरान आपके रिश्तेदार उन्हें बेचने से पहले अपने पास रखते हैं.

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उदाहरण के लिए, अगर आपने 1 जनवरी, 2022 को स्टॉक ख़रीदे थे और उन्हें 1 सितंबर, 2022 को अपने जीवनसाथी को गिफ़्ट में दिए और आपके जीवनसाथी ने 1 जनवरी, 2023 से पहले ये शेयर बेच दिए, तो कुल होल्डिंग पीरियड को शार्ट टर्म (12 महीने से कम) माना जाएगा.

इस स्थिति में, आपके रिश्तेदार को 15 फ़ीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा. लेकिन अगर आपका जीवनसाथी 1 जनवरी, 2023 के बाद इसे बेचता है - जो कि 12 महीने से ज़्यादा है - तो उस पर 10 फ़ीसदी टैक्स लगेगा, बशर्ते प्रॉफ़िट ₹1 लाख से ज़्यादा हो.

शेयर का ख़रीद मूल्य
इसके अलावा, आपको शेयरों के ख़रीद मूल्य यानी लागत पर विचार करना होगा.

  • अगर आप अपने शेयर किसी रिश्तेदार को ट्रांसफर करते हैं या गिफ़्ट में देते हैं, तो आपके रिश्तेदार के लिए ख़रीद की कॉस्ट वही होगी जिस कीमत पर आपने शेयर ख़रीदे थे.
  • अगर आप शेयर किसी गैर-रिश्तेदार को ट्रांसफर करते हैं, और ट्रांसफर पर कोई टैक्स नहीं है तो उनके लिए एक्विजिशन की कॉस्ट वही होगी जो आपके लिए थी.
  • हालांकि, अगर आप शेयरों को किसी गैर-रिश्तेदार को ट्रांसफर करते हैं, और ट्रांसफर टैक्सेबल है तो उनके लिए अधिग्रहण की कॉस्ट गिफ़्ट का मूल्य है जिस पर टैक्स लगा है.

मान लीजिए कि आप ₹49,999 के शेयर ट्रांसफर करते हैं, तो उनकी अधिग्रहण कॉस्ट वही रहेगी जिस क़ीमत पर आपने शेयर ख़रीदे थे. हालांकि, अगर आप ₹50,000 या उससे ज़्यादा मूल्य के शेयर ट्रांसफर करते हैं तो उनकी अधिग्रहण लागत गिफ़्ट में दिए गए शेयरों के मूल्य में बदल जाती है.

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ग्रैंडफादरिंग ऑफ़ गेन्स
Grandfathering of gains: ग्रैंडफादर क्लॉज़ एक ऐसा प्रावधान है जहां एक नया नियम आने पर पुराना नियम कुछ मौजूदा स्थितियों पर लागू रहता है. भविष्य के सभी मामलों पर नया नियम लागू होता.

इस मामले में, ग्रैंडफादरिंग ऑफ़ गेन्स केवल इक्विटी शेयरों और इक्विटी- ओरिएंटेड फ़ंड्स की यूनिट्स पर लागू होता है.

इस क्लॉज़ के अनुसार, 1 फरवरी, 2018 से पहले कोई भी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ़्री हो जाता था. हालांकि, किसी भी नुकसान का दावा केवल तभी किया जा सकता है जब वे पूर्ण यानी असंदिग्ध हो, मतलब अगर आप अपने शेयर ख़रीद मूल्य से कम पर बेचे हों.

संक्षेप में देखें तो ग्रैंडफादरिंग ऑफ़ गेन्स इस बात पर निर्भर करता है कि आप अधिग्रहण की कॉस्ट के रूप में कितना दावा कर सकते हैं.

आपकी एक्विजिशन की कॉस्ट ऐसे बढ़ती है,

1. एक्विजिशन की असल कॉस्ट (शेयरों या यूनिट्स को खरीदने के लिए आपने जो भी पैसे दिए हो), और,

2. ऐसे घटती है,

  • 31 जनवरी, 2018 तक का उपयुक्त बाजार मूल्य.
  • बिक्री से मिला पैसा.

आइए, तीन अलग-अलग उदाहरण देखते हैं जिससे इसे बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी.

केस 1
मान लीजिए कि आपने 31 जनवरी, 2015 को ₹10 प्रति शेयर के हिसाब से कुछ शेयर ख़रीदे और 2023 में उन्हें ₹100 प्रति शेयर पर बेच दिया. अब आप ग्रैंडफादरिंग ऑफ़ गेन्स के लिए एलिजिबल हैं और आपको 31 जनवरी, 2018 तक अपने लॉन्ग टर्म प्रॉफ़िट पर कोई टैक्स नहीं देना होगा. हालांकि 31 जनवरी, 2018 के बाद का प्रॉफ़िट टैक्सेबल है.

केस 2
इसके बाद, मान लीजिए कि आपने ये शेयर 31 जनवरी, 2015 को ₹10 प्रति शेयर के हिसाब से ख़रीदे थे. 2018 में इनकी क़ीमत बढ़कर ₹100 प्रति शेयर हो गई, लेकिन जनवरी 2023 में इनकी क़ीमत गिरकर ₹20 प्रति शेयर रह गई. इसमें, भले ही आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा लेकिन आप नुक़सान का दावा भी नहीं कर सकते.

केस 3
हालांकि, अगर आपने ये शेयर 31 जनवरी, 2015 को ₹10 प्रति शेयर के हिसाब से ख़रीदे थे. 2018 में इनकी कीमत बढ़कर ₹100 प्रति शेयर हो गई, लेकिन जनवरी 2023 में इनकी कीमत घटकर ₹5 प्रति शेयर रह गई; आप नुक़सान का दावा कर सकते हैं और उसकी भरपाई कर सकते हैं.

आप अपनी होल्डिंग्स को देख सकते हैं और कैलकुलेट कर सकते हैं कि कितना प्रॉफ़िट टैक्सेबल है.

या इससे भी बेहतर, आप धनक पर 'मेरे निवेश' पर जाएं और अपना निवेश ऐड करें, और हम आपको बताएंगे कि आपका प्रॉफ़िट क्या है और आपके ऊपर कितना टैक्स बनता है.

देखिए ये वीडियो- सेंसेक्स ऐतिहासिक स्तर पर, क्या अभी निवेश करना सही है?

इनकम को क्लब करना
आख़िर में, इनकम के प्रोविजंस की क्लबिंग तब लागू होती है जब ट्रांसफ़र की गई एसेट से इनकम बनती है. नीचे दी गई सभी परिस्थितियों में, एसेट से बनने वाली इनकम आपके रिश्तेदार के बजाय आपके लिए टैक्सेबल है यानी इसके लिए आपको टैक्स देना होगा.

1. जब आप पर्याप्त विचार किए बिना अपनी एसेट्स अपने जीवनसाथी को ट्रांसफर करते हैं, सिवाय इसके कि जब,

  • अलग रहने के लिए समझौते के भाग के रूप में
  • शादी से पहले
  • रिलेशन खत्म होने के बाद इनकम मिलने पर
  • जीवनसाथी ने ख़र्च के पैसे से एसेट ख़रीदी हो

2. नतीजा सोचे बिना अपने बेटे की पत्नी को एसेट ट्रांसफर करने पर।

3. अपने जीवन साथी या बेटे की पत्नी को होने वाले तत्काल या विलंबित बेनिफ़िट पर विचार किए बिना किसी और को एसेट ट्रांसफर करने पर.

संक्षेप में कहें तो, अगर आप अपने प्रियजनों को शेयरों के तौर पर वेल्थ गिफ्ट करना चाहते हैं, तो आपको टैक्सेशन की विभिन्न बारीक़ीयों पर सोचने समझने के बाद ही ऐसा करना चाहिए.

धनक साप्ताहिक

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ये लेख पहली बार जुलाई 11, 2023 को पब्लिश हुआ.

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