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NPS का एक और अपग्रेड (शायद)

रिटायरमेंट के व्यापक हल के लिए विथड्रॉल के नए विकल्प के साथ-साथ कुछ और चुनौतियों की बात

रिटायरमेंट के व्यापक हल के लिए विथड्रॉल के नए विकल्प के साथ-साथ कुछ और चुनौतियों की बातAnand Kumar

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6:15

क़रीब दो हफ़्ते पहले, मैंने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में हुए बड़े बदलाव पर लिखा था. रिटायरमेंट के लिए जिन लोगों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में एनरोल कराया है, उनके लिए सरकार ने एक नया विथड्रॉल का तरीक़ा शुरू किया है. अब, पेंशन पाने वाले 75 साल की उम्र तक अपनी पेंशन का एक हिस्सा, रेग्युलर पेआउट की तरह क़िश्तों में निकाल सकेंगे. ये हर महीने, हर क्वार्टर, छह महीने और साल में एक बार के पेमेंट के तौर पर पेंशनर अपनी पसंद के मुताबिक़ ले सकेंगे. पूरे पेंशन कॉर्पस का 60 प्रतिशत इस तरह से निकाला जा सकता है. पहली नज़र में, ये बदलाव सरल-साधारण लगता है.

दरअसल, ये NPS सब्सक्राइबरों को काफ़ी फ़्लेक्सेबिलिटी देता है कि वो किस तरह से एक अर्से के दौरान अपने रिटायरमेंट फ़ंड से पैसा निकालना चाहते हैं. अब, कुछ और बातें भी गर्म हैं - हालांकि अभी ये आधिकारिक नहीं - कि इस तरह से पूरा कॉर्पस क़िश्तों में निकाला जा सकता है. इस समय, जब कोई कर्मचारी NPS के साथ रिटायर होता है, तो उन्हें अपनी पेंशन के कुल क़ॉर्पस के 40 प्रतिशत से किसी इंश्योरेंस कंपनी की एन्युटी ख़रीदनी पड़ती है, जिससे उनको रेग्युलर इनकम मिलती है. ये एन्युटी ख़रीदना उनके लिए अनिवार्य होता है.

NPS का ये बदलाव एक बहुत बड़ा अपग्रेड होगा. किसी भी पेंशन सिस्टम के दो हिस्से होते हैं. पे-इन, जिस दौरान रिटायर होने से पहले रक़म जमा होती रहती है, और पे-आउट, जो रिटायरमेंट के बाद का वक़्त होता है जब पेंशन मिलती है. कुछ चुनौतियों के बावजूद, इस समय NPS में एक बढ़िया रिटायरमेंट सिस्टम की सारी बड़ी-बड़ी ख़ूबियां मौजूद हैं. इसका ख़र्च कम है, और सबसे बड़ी बात कि इसका इन्वेस्टमेंट रिकॉर्ड शानदार रहा है. ये बात ज़रूरी इसलिए है क्योंकि किसी भी रिटायरमेंट सिस्टम के सबसे अहम हिस्सा होता है - जो इसके होने की वजह है - कि रिटायर होने वाला शख़्स अपने बुढ़ापे में कितने आराम का जीवन जी पाएगा. अगर एक पेंशन सिस्टम इसे मज़बूती से डिलिवर कर पाता है, तो बाक़ी सभी चीज़ें कमोबेश आसान हो जाती हैं.

नेशनल पेंशन सिस्टम मॉडल के जो आलोचक इसके असरदार होने पर सवाल खड़े करते हैं, उनके पास अब अपनी बात के लिए कम ही तर्क बचे हैं. इसके रिटर्न शानदार रहे हैं, और NPS फ़ंड मैनेजमेंट से जुड़ी फ़ीस जो बेहद कम है, उसने इसकी यील्ड में पॉज़िटिव कॉन्ट्रीब्यूशन किया है. कम ख़र्च के कारण लंबे वक़्त में कंपाउंडिंग का फ़ायदा मिलता है, और क्योंकि NPS के निवेशक काफ़ी लंबे समय तक निवेश में बने रहते हैं, इसलिए इसका फ़ायदा और भी ज़्यादा बढ़ जाता है. मज़बूत लॉन्ग-टर्म रिटर्न और कम ख़र्च के चलते, एक रिटायरमेंट प्रोग्राम के तौर पर NPS की आलोचना मुश्किल काम है. इसके तहत बचत करने वालों को मिला इसका तगड़ा नतीजा ही इसके बढ़िया प्रदर्शन की कहानी बयान कर देता है.

हालांकि, NPS की एक अच्छे सफ़र से शानदार सफ़र में बदलने की कहानी पूरी होने के लिए, इसके कुछ हिस्सों पर काम किए जाने की ज़रूरत है.

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इनमें जो बड़ी बात है, वो है इक्विटी पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाना. क्योंकि अब हमारे पास एनेलाइज़ करने के लिए एक असली ट्रैक रिकॉर्ड है, इसलिए इक्विटी एक्सपोज़र की लॉन्ग-टर्म में बड़ी पूंजी खड़ी करने की क्षमता साबित हो गई है. ये साफ़ हो गया है कि लॉन्ग-टर्म निवेशों को इक्विटी में नहीं रखना NPS के सदस्यों को ग़रीब बनाए रखने का तरीक़ा है.

मेंबरों को उनके बुढ़ापे में आर्थिक तौर पर ज़्यादा संपन्न बनाने के लिए, NPS में ज़्यादा इक्विटी एक्सपोज़र होना ही चाहिए. क्योंकि अब विथड्रॉल को टाला भी जा सकता है और साथ ही सिस्टमैटिक विथड्रॉल भी किया जा सकता है, इसलिए NPS अब उन लोगों के पास भी है जो अब रिटायर हो चुके हैं. जीवन के इस हिस्से के लिए इक्विटी एक्सपोज़र की ज़रूरत को भी क़रीब से देखा जाना चाहिए.

दूसरी मुश्किल है एन्युटी. इसका तर्क सरल है. रिटायर होने वालों को मृत्यु तक गारंटी वाला सपोर्ट चाहिए. इसका सबसे प्रैक्टिकल तरीक़ा एन्युटी ही है, पर भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों के एन्युटी प्रोडक्ट बेकार हैं. हमारे सिस्टम में इंश्योरेंस इंडस्ट्री को ठीक करने के लिए मजबूर करने का किसी के पास तो अख़्तियार होना चाहिए, हालांकि मुझे नहीं पता वो कौन होगा. अपनी तरफ़ से NPS, एन्युटी की ज़रूरत को ख़त्म कर सकता है, जैसा कि चर्चा में आए इस नए विकल्प की बात हो रही है.

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एक मुश्किल बुढ़ापे के हेल्थ कवर की है. स्वास्थ्य की देखभाल का ख़र्च लगभग हर रिटायर्ड व्यक्ति के भविष्य के लिए टाइम बम की तरह है. एक समय ऐसा आता है जब रिटायर्ड लोगों के फ़ाइनांस के बड़े हिस्से को ये तबाह कर देता है. रिटायरमेंट के बाद इसे NPS पैकेज का हिस्सा बनाना इस समस्या का एक समाधान हो सकता है.

निष्पक्षता से बात करें, तो एन्युटी और सेहत की देखभाल, दोनों असल में NPS के हल करने की समस्याएं नहीं हैं. ये दोनों ही बातें NPS के दायरे से बाहर हैं, लेकिन क्योंकि ये दोनों असल में बड़ी समस्याएं हैं जिनका रिटायर्ड लोग सामना करते हैं, शायद इसीलिए पेंशन सिस्टम इन्हें सुलझाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकता है और इन्हें दुरुस्त करने में मदद कर सकता है.

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