एन.पी.एस.

एक NRI क्या NPS टियर-II अकाउंट खुलवा सकता है?

कोई NRIs कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद ही NPS अकाउंट में निवेश कर सकता है

कोई NRIs कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद ही NPS अकाउंट में निवेश कर सकता है

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) भारत सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य सभी भारतीय नागरिकों, चाहे वे निवासी हों या अनिवासी (NRI), को पेंशन लाभ पहुंचाना है.18-60 वर्ष तक उम्र के अनिवासी भारतीयों के पास अगर PAN कार्ड और एक बैंक अकाउंट है, तो वे NPS टियर 1 और टियर 2 दोनों ही अकाउंट खुलवा सकते हैं.

किसी भी NRI का टियर 1 अकाउंट तीन केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (CRA) - प्रोटियन (NSDL), केफ़िनटेक (KFintech) और CAMS - में से किसी की भी वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन खोला जा सकता है, जबकि टियर 2 अकाउंट ऑनलाइन नहीं खोला जा सकता है. टियर 2 अकाउंट खोलने के लिए NRI को ख़ुद उपस्थित होना पड़ता है.

टियर 2 अकाउंट खोलने के लिए NRIs को पॉइंट ऑफ़ प्रजेंस (POP) से संपर्क करना पड़ता है. पॉइंट ऑफ़ प्रजेंस एक मीडिएटर के रूप में NPS अकाउंट खोलने में मदद करते हैं. पॉइंट ऑफ़ प्रजेंस की सूची देखने के लिए यहां क्लिक करें.

टियर 2 अकाउंट से विड्रॉल पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन इस अकाउंट में निवेशक टैक्स संबंधी फ़ायदे नहीं उठा सकता है. केवल NPS टियर 1 अकाउंट में किए गए निवेश पर ही इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स संबंधी फ़ायदे लिए जा सकते हैं. NPS टियर 1 में किए गए निवेश पर ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट के अलावा, धारा 80CCD (1B) के तहत ₹50,000 तक की अतिरिक्त छूट भी ली जा सकती है.

ये भी पढ़िए- NPS आपका ज़्यादा टैक्स बचा सकता है

अगर किसी NRI के पास आधार (Aadhaar ) है और उसका मोबाइल नंबर आधार डेटाबेस के साथ जुड़ा हुआ है, तो NPS टियर 1 अकाउंट खोलने की प्रक्रिया काफ़ी सरल है. OTP वेरिफिकेशन के बाद व्यक्ति से जुड़ी जानकारियां और उसकी फ़ोटो अपने आप मिल जाती हैं. इसके अलावा, व्यक्ति को अपने हस्ताक्षर, PAN, पासपोर्ट और एक कैंसिल चेक की स्कैन की हुई कॉपी अपलोड करनी होती है. NRI के पास अपने नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) अकाउंट और नॉन-रेजिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) अकाउंट की डिटेल होनी भी ज़रूरी है. वे अपना NPS अकाउंट प्रत्यावर्तनीय यानी repatriable और गैर-प्रत्यावर्तनीय यानी non-repatriable) दोनों ही तरीक़े से खोल सकते हैं.

क्या होता है रिपैट्रिएबल अकाउंट

रीपैट्रिएबल और नॉन रिपैट्रिएबल निवेश उन्हें कहा जाता है जो NRI या विदेशी कंपनी द्वारा भारत में किए जाते हैं. वे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और RBI नियमों के तहत आते हैं.

रीपैट्रिएबल निवेश (NRI द्वारा किए गए) को भारत के बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है. वहीं, , नॉन रिपैट्रिएबल (NRO द्वारा किए गए) को भारत से बाहर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है.

रीपैट्रिएबल अकाउंट मेच्योरिटी इनकम और पेंशन राशि को किसी दूसरे देश में ट्रांसफर करने की अनुमति देता है, जबकि नॉन अकाउंट में इसकी अनुमति नहीं होती है.

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ये लेख पहली बार नवंबर 03, 2023 को पब्लिश हुआ.

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