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क्या मुझ पर दो बार टैक्स लगेगा?

हर बार फ़ंड से पैसा निकालने पर टैक्स लगता है, पर एक तरीक़ा है टैक्स बचाने का.

हर बार फ़ंड से पैसा निकालने पर टैक्स लगता है, पर एक तरीक़ा है टैक्स बचाने का.

मेरा ज़्यादातर पैसा इक्विटी में है. अगर रिटायर होने के तीन साल पहले मैं इस पैसे को Debt fund में ट्रांसफ़र करता हूं, तो मुझे capital gains tax देना होगा, क्योंकि profit ₹1 लाख की छूट से ज़्यादा होने की संभावना है. लेकिन बाद में, अगर मैं liquid fund से अपने बैंक अकाउंट में SWP सेट-अप करता हूं. तो क्या मुझ पर फिर से tax लगेगा? - सब्स्क्राइबर

हां, कमाए गए कैपिटल गेन पर दोनों मामलों में टैक्स लगेगा.

हालांकि, दोनों मामलों में कैपिटल गेन्स टैक्स के भुगतान का मतलब हमेशा ही दो गुना टैक्स नहीं होता. दरअसल, हर केस में, कैपिटल गेन्स टैक्स होल्डिंग के पीरियड के मुताबिक़ लगाया जाता है. जो कम या ज़्यादा हो सकता है.

आप यहां दिए गए लिंक पर जा कर कई स्थितियों में टैक्स की देनदारी को समझ सकते हैं.

ये भी पढ़िए- म्यूचुअल फ़ंड के SWP का टैक्स पर असर

इसके अलावा, अपने लंबे समय के निवेश के लक्ष्य तक पहुंचने से दो-तीन साल पहले ही, इक्विटी के पैसों को फ़िक्स्ड इनकम में स्विच करने का फ़ैसला हमेशा अच्छा रहता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि कम समय के दौरान इक्विटी पर अच्छे रिटर्न का भरोसा नहीं किया जा सकता.

इसलिए, जैसे-जैसे आप अपने लक्ष्य के क़रीब आते हैं, अपने पैसों को व्यवस्थित तरीक़े से कम उतार-चढ़ाव वाली एसेट कैटेगरी (फ़िक्सड-इनकम) में ट्रांसफ़र करना ज़रूरी होता है.

ऐसे मौक़े पर सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) का इस्तेमाल फ़ायदे की बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि (SWP के ज़रिए) इक्विटी फंड से पैसे निकालने के ठीक पहले पैसे को फ़िक्सड-इनकम में रखने से बाज़ार के निचले स्तर के दौरान बाहर निकलने का रिस्क कम हो जाता है.

ये भी पढ़ें: SIP क्या है और यह कैसे काम करती है?

ये लेख पहली बार फ़रवरी 26, 2024 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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