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स्मॉल-कैप फ़ंड्स के स्ट्रेस टेस्ट नतीजों से चिंतित हैं आप?

AMCs ने अपने स्मॉल और मिड-कैप फ़ंड्स में लिक्विडिटी की स्थिति बताई. हम बताएंगे, आप किन चीज़ों पर ध्यान दें.

AMCs ने अपने स्मॉल और मिड-कैप फ़ंड्स में लिक्विडिटी की स्थिति बताई. हम बताएंगे, आप किन चीज़ों पर ध्यान दें.

म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों में काफ़ी हलचल है और वजह है, फ़ंड हाउस (AMC) का अपनी स्मॉल और मिड-कैप स्कीमों की होल्डिंग को तेज़ी से भुनाने (liquidate) की उनकी क्षमता का ख़ुलासा. स्ट्रेस टेस्ट की ज़रूरत मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों के लिए साल 2023 बेहद शानदार रहा और निवेशकों ने इनमें क़रीब ₹64,000 करोड़ का निवेश किया. इसी बंपर निवेश ने SEBI का ध्यान खींचा है. मार्केट रेगुलेटर इस बात से चिंतित है कि क्या ये फ़ंड, जब चाहें तब अपने स्टॉक बेच सकते हैं, और क्या वो बिना कोई बड़ा नुक़सान उठाए ऐसा कर सकते हैं या नहीं. जल्द ही, असोसिएशन ऑफ़ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया (AMFI) ने सभी फ़ंड हाउस को इस विषय में सक्रिय होने का निर्देश दिया. इतने बड़े इन-फ़्लो (निवेश) को देखते हुए, रेगुलेटर की चिंता स्वाभाविक है. पर क्या अब आपको स्मॉल और मिड-कैप फ़ंड्स में निवेश रोक देना चाहिए? हमें लगता हैं कि आपको ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है. हमारा मानना है कि भारत जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्था में मिड और स्मॉल कैप बेहतरीन विकल्प हैं क्योंकि वे आम तौर पर देश की उद्यमशीलता दिखाते हैं. बावजूद इसके, इनसे जुड़े जोख़िमों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. लिक्विडिटी की मुश्किल लार्ज-कैप फ़ंड्स के उलट, मिड- और स्मॉल-कैप सेगमेंट को लिक्विडिटी की समस्या का सामना करना पड़ता है, ख़ासकर तब, जब उनका एसेट साइज़ बढ़ता है. एक स्मॉल-कैप फ़ंड को छोटी कंपनियों में निवेश करना होता है. छोटी कंपनियों को आमतौर पर लिक्विडिटी (आसानी से शेयर बेच कर पैसे पाने) की समस्या का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उनके शेयरों को बड़ी मात्रा में ख़रीदना-बेचना अक्सर मुश्किल होता है. मिसाल के तौर पर, एक स्मॉल-कैप फ़ंड मैनेजर, एक छोटे साइज़ की कंपनी के 50,000 शेयर ख़रीद सकता है, पर उसी कंपनी के 5 लाख शेयर ख़रीदना मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा, किसी छोटी कंपनी के शेयर बेचने से उनकी क़ीमत में भारी गिरावट हो सकती है. इसलिए, एक फ़ंड मैनेजर को शेयर ख़रीदने और बेचने का फ़ैसला काफ़ी नाप-तोल कर लेना होता है. स्ट्रेस टेस्ट के नतीजे AMCs के लिए एक ख़ास तरीक़े से अपनी लिक्विडिटी की क्षमता का अनालेसिस करना ज़रूरी कर दिया गया है. इसमें, पिछले तीन महीनों में किसी स्टॉक के औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम को शामिल किया जाता है ताकि ये पता चल सके कि फ़ंड को किसी स्टॉक में अपनी पोज़ीशन बेचने में कितने दिन लगेंगे. इसलिए, AMCs ने अपने स्ट्रेस टेस्ट के नतीजे बताना शुरू कर दिए हैं, यानी, वे कितनी जल्दी अपने स्मॉल- और मिड-कैप फ़ंड की 25 फ़ीसदी और 50 फ़ीसदी होल्डिंग बेच सकते हैं. नीचे दी गई टेबिल में हमारे सुझाए, स्मॉल-कैप और मिड-कैप फ़ंड्स के स्ट्रेस टेस्ट नतीजे दिए हैं. हमने पाया कि इन फ़ंड्स को अपने जैसे बाक़ी साथियों की तुलना में ज़्यादा वक़्त लगता है. बाक़ी फ़ंड्स के स्ट्रेस टेस्ट नतीजे देखने के लिए  यहां क्लिक करें. हमारे सुझाए गए फ़ंड्स के स्ट्रेस टेस्ट के नतीजे फ़ंड का नाम कैटेगरी AUM (करोड़ ₹) 25% पोर्टफ़ोलियो बेचने में लगने वाले दिन 50% पोर्टफ़ोलियो बेचने में लगने वाले दिन कोटक इमर्जिंग इक्विटी फ़ंड मिड कैप 39,732

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