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ग्रोथ फ़ंड्स के लिए क्या हो निवेश स्ट्रैटजी?

तेजड़ियों और मंदड़ियों के बीच रस्साकशी में आख़िरकार लॉन्ग-टर्म निवेशक ही जीतता है

तेजड़ियों और मंदड़ियों के बीच रस्साकशी में आख़िरकार लॉन्ग-टर्म निवेशक ही जीतता है

जैसा कि इक्विटी को लेकर पूरी दुनिया में उम्मीद और घबराहट दोनों हैं, अब वक़्त आ गया है कि हम अपनी 'ग्रोथ' बकेट पर एक नज़र डालें. चूंकि ये बकेट आपके इक्विटी पोर्टफ़ोलियो का मुख्य आधार है और अभी इक्विटी को लेकर अस्थिरता दिखाई दे रही है, इसलिए जांच-पड़ताल के लिए ये वक़्त बिलकुल ठीक है. हमारे रीडर्स पहले से ही जानते होंगे कि फ़्लेक्सी-कैप, लार्ज एंड मिड-कैप और वैल्यू-ओरिएंटेड फ़ंड्स हमारी ग्रोथ बकेट में शामिल हैं. लेकिन जो नई बात है, वो है लोकप्रिय मल्टी-कैप फ़ंड्स का शामिल होना. तो, बिना किसी देरी के, आइए अभी की स्थिति से निपटने से पहले हमारी 'ग्रोथ' कैटेगरी में चल रहे प्रमुख ट्रेंड्स पर नज़र डालें. वैल्यू स्टाइल का दबदबा बरक़रार है 'वैल्यू स्टाइल' निवेश ने ग्रोथ पर फ़ोकस करने वाले फ़ंड्स के बीच अपना दबदबा कायम रखा है. 'ग्रोथ स्टाइल' कुछ समय के लिए दोबारा ट्रेंड में आया था, पर ये ज़्यादा दिन नहीं चला. इस तरह, वैल्यू स्टाइल निवेश ने लगातार तीसरे साल अपनी जीत का सिलसिला बरक़रार रखा है. अगर 'निफ़्टी 500' के मुकाबले 'निफ़्टी 500 वैल्यू 50 इंडेक्स' के प्रदर्शन को देखें, तो डेटा से पता चलता है कि 'वैल्यू' फ़ैक्टर ने पिछले साल के आख़िर में अच्छी-ख़ासी मज़बूती हासिल की. इस साल भी इस फ़ैक्टर ने मज़बूती बरक़रार रखी है. (जो नहीं जानते उन्हें बता दें कि निफ़्टी 500 वैल्यू 50 इंडेक्स में निफ्टी 500 के टॉप 50 वैल्यू स्टॉक्स शामिल किए जाते हैं.) एक्टिव फ़ंड्स डगमगा रहे हैं सितंबर 2023 में हमारे आख़िरी कैटेगरी अपडेट के वक़्त, बड़ी संख्या में एक्टिव फ़ंड्स (90 फ़ीसदी से ऊपर) ने तीन 'ग्रोथ' कैटेगरी में BSE 500 इंडेक्स को पछाड़ा था. (हमने यहां मल्टी-कैप फ़ंड्स को शामिल नहीं किया था, क्योंकि वे एक नए-नए आए हैं.) तब से स्थिति बदल गई है. 2023 की घरेलू रैली ने घाटे की भरपाई करने में BSE 500 इंडेक्स की मदद की. अब, फ़्लेक्सी-कैप और लार्ज एंड मिड-कैप कैटेगरी में आधे से भी कम एक्टिव फ़ंड्स BSE 500 को मात दे रहे हैं. नतीजा, उनकी कैटेगरी के रिटर्न को नुक़सान पहुंच रहा है जैसा कि नीचे दिए गए ग्राफ़ में देखा जा सकता है. सिर्फ़ एक्टिव वैल्यू-ओरिएंटेड फ़ंड्स ही बढ़त बनाए हुए हैं. वापसी की राह पर फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी (जो इस साल की पहली दो तिमाहियों में कम होती दिख रही थी) फिर से जग रही है, जो कि शायद स्मॉल और मिड-कैप फ़ंड्स में मंदी का संकेत है. इस बीच, बाक़ी तीन फ़ंड कैटेगरी में इन्फ़्लो कमोबेश स्थिर रहा है. तेजड़ियों और मंदड़ियों के बीच रस्साकशी भारतीय इक्विटी मार्केट में रस्साकशी चल रही है. बुल और बियर अपना-अपना दांव लगाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. सकारात्मक नज़रिया रखने वाले लोग मज़बूत मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा और मज़बूत फंडामेंटल्स का हवाला दे रहे है

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