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सारांशः बजट 2023 के टैक्स बदलावों ने डेट फ़ंड और FD के बीच का फ़ासला कम कर दिया है. लेकिन डेट फ़ंड अभी भी लिक्विडिटी और टैक्स डिफ़रल में आगे हैं. कौन बेहतर है यह आपके निवेश की अवधि और टैक्स ब्रैकेट पर निर्भर करता है.
क्या FD के बजाय डेट फ़ंड रखने लायक़ हैं?
डेट फ़ंड ऐसे म्यूचुअल फ़ंड हैं जो बॉन्ड और ट्रेज़री बिल जैसे फ़िक्स्ड-इनकम के विकल्पों में निवेश करते हैं. ये पूरी तरह जोख़िम-मुक्त नहीं हैं, लेकिन ऐतिहासिक रूप से FD से बेहतर रिटर्न दिया है और लिक्विडिटी कहीं ज़्यादा है.
1 अप्रैल 2023 के बाद किए गए निवेश पर टैक्स अब भी वही है यानी फ़ायदे पर आपकी आमदनी के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. लेकिन उससे पहले किए गए निवेश पर इंडेक्सेशन का फ़ायदा छिन गया, जो पहले लंबी अवधि में टैक्स की देनदारी कम करता था. इससे FD पर डेट फ़ंड की एक बड़ी बढ़त ख़त्म हो गई.
टैक्स से जुड़े बदलाव के बावजूद डेट फ़ंड के कुछ ख़ास फ़ायदे बचे हैं:
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पहलू
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डेट फ़ंड | फ़िक्स्ड डिपॉज़िट |
|---|---|---|
| टैक्स का समय | फ़ायदे पर टैक्स सिर्फ़ निकासी पर, यानी टैक्स टाला जा सकता है | ब्याज पर हर साल टैक्स |
| लिक्विडिटी | कभी भी बिना जुर्माने के निकाल सकते हैं | जल्दी निकासी पर जुर्माना |
| रिटर्न | लंबे समय में थोड़ा ज़्यादा | अनुमानित लेकिन आमतौर पर कम |
किन डेट फ़ंड में निवेश करना चाहिए?
डेट फ़ंड में निवेश आपकी निवेश की अवधि, वित्तीय लक्ष्य और जोख़िम सहने की क्षमता जैसी कई बातों पर निर्भर करता है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र के साथ इस बारे में एक्सपर्ट की राय लें कि आपकी ज़रूरत के हिसाब से कौन से डेट फ़ंड सही हैं.
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ये लेख पहली बार जून 01, 2026 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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