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म्यूचुअल फ़ंड क्यों लगा रहे हैं फ़ाइनेंशियल सेक्टर पर बड़ा दांव?

फ़ंड मैनेजर अनसिक्योर्ड लेंडिंग को लेकर बढ़ती चिंता की ख़बरों को पूरे उद्योग की समस्या नहीं मानते

फ़ंड मैनेजर अनसिक्योर्ड लेंडिंग को लेकर बढ़ती चिंता की ख़बरों को पूरे उद्योग की समस्या नहीं मानतेNitin Yadav/AI-Generated Image

सारांशः भारत के फ़ाइनेंशियल सेक्टर में बिना गारंटी वाले क़र्ज़ में बढ़ती चिंताएं सुर्खियों में है. लेकिन भागने के बजाय, कई म्यूचुअल फ़ंड अभी भी फ़ाइनेंशियल सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं. तो, फ़ंड मैनेजर इस क्षेत्र में क्यों निवेश बनाए हुए हैं? दो फ़ंड मैनेजर अपनी राय रखते हैं.

भारत का फ़ाइनेंशियल सेक्टर बिना गारंटी वाले क़र्ज़, खासकर पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और MSME फ़ाइनेंसिंग में बढ़ते तनाव के कारण दबाव में है. नतीजतन, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चिंताएं जताई हैं और रेटिंग एजेंसियों ने भी उभरते जोखिमों की चेतावनी दी है.

फिर भी, म्यूचुअल फ़ंड - ख़ासकर फ़्लेक्सी-कैप और फ़ोकस्ड फ़ंड- की तरफ़ से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं मिल रहे और वो फ़ाइनेंशियल सेक्टर पर भारी दांव लगा रहे हैं.

सिस्टम स्तर पर कोई तनाव नहीं

DSP फ़्लेक्सी कैप, बंधन फ़ोकस्ड, HDFC फ़ोकस्ड और HDFC फ़्लेक्सी कैप जैसी स्कीमों ने 35-38 प्रतिशत की रेंज में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी है, जो निफ़्टी 500 TRI के 28.28 प्रतिशत से काफ़ी ऊपर है.

इस भरोसे से पता चलता है कि भले ही निकट भविष्य में कुछ चुनौतियां बनी रहें, लेकिन फ़ंड मैनेजर इस क्षेत्र की संरचनात्मक ताकत को लेकर आश्वस्त हैं.

फ़ाइनेंशियल सेक्टर में 38.6 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले DSP फ़्लेक्सी कैप फ़ंड के फ़ंड मैनेजर भाविन गांधी ने कहा, “कुछ क्षेत्रों में समस्याएं हैं, लेकिन सिस्टम स्तर पर ऐसा नहीं है. भले ही, एक प्रमुख NBFC (नॉन-बैंकिंग फ़ाइनेंस कंपनी) ने MSME में चिंताओं को उजागर किया और एक अन्य प्राइवेट बैंक ने एकमुश्त प्रोविजनिंग के प्रभाव के कारण समस्याएं बताईं, लेकिन HDFC बैंक में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखे और ICICI बैंक ने संकेत दिया कि बिना गारंटी वाले रिटेल लोन फिर से बढ़ सकते हैं. इसका मतलब है कि प्रत्येक बैंक का तनावग्रस्त क्षेत्रों में एक्सपोज़र अलग-अलग है.”

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वैसे, S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने हाल ही में छोटे-मोटे बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, कमर्शियल व्हीकल लोन और माइक्रोफ़ाइनांस लेंडिंग में तेज़ ग्रोथ को चिह्नित किया है. लेकिन कुछ फ़ंड मैनेजर इसे चेतावनी के रूप में नहीं देखते. बल्कि, वे फ़ाइनेंशियल स्टॉक्स में हाल की गिरावट को ख़रीदारी का अवसर मानते हैं.

गांधी ने कहा, “हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा में चिंताएं बढ़ने का कोई संकेत नहीं है. हम इस पर क़रीब से नज़र रख रहे हैं, लेकिन अभी तक क्रेडिट साइकिल बनने का कोई संकेत नहीं है,”.

बंधन AMC के वाइस प्रेसिडेंट - इक्विटी कीर्ति जैन ने भी बिना गारंटी वाले क़र्ज़ के तनाव को कम करके आंका और कहा, “पिछले तीन तिमाहियों में इसे पहले ही नियंत्रित किया जा चुका है और हमें लगता है कि इस सेगमेंट में तनाव अब अपने चरम पर है. हम चुनिंदा रूप से उन शेयरों में निवेश कर रहे हैं जिनके पास मजबूत प्रोविजन कवरेज रेशियो हैं.”

कुछ लेंडर्स के अपने लंबे समय के औसत से डिस्काउंट पर ट्रेड होने के साथ, वैल्यूएशन के चलते भी अवसर पैदा हो रहे हैं. यही कारण है कि फ़ंड मैनेजर चुनिंदा रूप से क्वालिटी वाले नामों को जमा कर पा रहे हैं.

बंधन AMC के जैन ने कहा, “मजबूत बैलेंस शीट, नेट इंटरेस्ट मार्जिन का एक तिमाही में संभवतः निचला स्तर छूना और आकर्षक वैल्यूएशन ये सब मिलकर हमें फ़ाइनेंशियल सेक्टर के प्रति सकारात्मक बनाते हैं.”

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