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मल्टी-एसेट फ़ंड: आधी हक़ीक़त, आधा फ़साना

हम मल्टी-एसेट कैटेगरी को ध्यान में रखते हुए आपके पोर्टफ़ोलियो में गोल्ड की भूमिका का पता लगा रहे हैं

हम मल्टी-एसेट कैटेगरी को ध्यान में रखते हुए आपके पोर्टफ़ोलियो में गोल्ड की भूमिका का पता लगा रहे हैं

दुनिया भर में उथल-पुथल मचाने वाली घटनाओं से भरे साल में, भारतीय निवेशकों में फ़ाइनेंशियल ग्रोथ के लिए भूख दिखाई दी है. इस साल एक करोड़ से ज़्यादा लोगों ने नई SIP शुरू की. असल में, अगर मौजूदा रुझान साल के बाक़ी तीन महीनों के दौरान बना रहता है, तो 2023 संभावित रूप से अब तक का सबसे ज़्यादा SIP वाला साल बन सकता है. कहा जा रहा है कि निवेशकों की प्राथमिकताओं को बारीक़ी से देखने पर एक दिलचस्प तस्वीर उभरती है. ये फ़्लेक्सी-कैप या लार्ज-कैप जैसे पारंपरिक इक्विटी फ़ंड नहीं हैं, जो इंटरस्ट पर हावी हो गए हैं. इसके बजाय, ये मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों के अनजान सेक्टरों में निवेश करने वाले फ़ंड हैं जिन्होंने इस साल निवेश को काफ़ी ज़्यादा आकर्षित किया है. दिलचस्प ये है कि जो कैटेगरी इन ऊंची उड़ान भरने वाले विकल्पों को भी अपने पैसे के लिए चुनौती दे रही है, वो मल्टी-एसेट एलोकेशन फ़ंड्स हैं. नए फ़ंड ऑफ़र (NFOs) की एक मज़बूत पाइपलाइन के साथ, इस कैटेगरी में एक्टिव फ़ंड्स में अब तक लगभग ₹15,000 करोड़ का दमदार इनफ़्लो देखा गया है. असल में, सभी इक्विटी और हाइब्रिड फ़ंड्स में केवल मिड-कैप, स्मॉल-कैप, सेक्टोरल फ़ंड और आर्बिट्राज फ़ंड ही इस आंकड़े को पार करने में क़ामयाब रहे हैं. जहां तक हमारे सब्सक्राइबरों की बात है, हम निवेश के लिए आपके भरोसेमंद गाइड बनने की कोशिश करते हैं, और हमारा मिशन सिर्फ़ इस सुझाव तक ही सीमित नहीं है कि निवेश कहां करना है. इसमें आपको संभावित नुक़सान से दूर रखना भी शामिल है. हालांकि, हमारी ‘अवॉयडेबल’ (Avoidable) लिस्ट में मौजूद कुछ फ़ंड्स को लेकर भी निवेशकों में काफ़ी दिलचस्पी पैदा होती है. ये कैटेगरी अक्सर हमारे सामान्य कवरेज से परे होती हैं और हमें किसी भी निवेशक की ज़रूरत के लिए उनकी उपयुक्तता का पता लगाने, अनालिसिस करने और मूल्यांकन करने लायक़ बनाती हैं. तो, आइए इस स्टोरी में मल्टी-एसेट एलोकेशन फ़ंड्स पर ग़ौर करते हैं. मल्टी-एसेट फ़ंड्स क्या होते हैं? मल्टी-एसेट फ़ंड कम से कम तीन एसेट क्लास में निवेश करते हैं और प्रत्येक में न्यूनतम 10 फ़ीसदी आवंटन होता है. तय नियमों के तहत, विदेशी सिक्योरिटीज़ को यहां एक अलग एसेट क्लास के रूप में नहीं माना जाता है. इस समय, इस कैटेगरी के 31 फ़ंड्स ₹70,000 करोड़ के एसेट मैनेज करते हैं. हालांकि, इन सभी एसेट्स (या AUM) का प्रबंधन लगभग आधे फ़ंड्स द्वारा प्रभावी ढंग से किया जाता है. और इस सेट के भीतर भी, ICICI प्रूडेंशियल के दो फ़ंड्स की 60 फ़ीसदी हिस्सेदारी पर क़ब्जा है. ये भी पढ़िए- जो सेक्टर दबाव में हैं हमें लुभाते हैं: ICICI प्रू के सीनियर फ़ंड मैनेजर ये फ़ंड कहां निवेश करते हैं? वास्तव में, तीन एसेट क्लास को एक ही जगह, सुविधाजनक पैकेज में मिलाने का आकर्षण निवेशकों को अपनी ओर खींचता है, जिससे मल्टी-एसेट फ़ंड एक आकर्षक विकल्प बन जाता है. हाल

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