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क्या पिरामल फ़ार्मा के शानदार ग्रोथ गाइडेंस पर दांव लगाना चाहिए?

कंपनी की फ़ाइनेंशियल ईयर 30 तक अपने EBITDA को तीन गुना करने की योजना है. क्या ये एक सही निवेश है?

कंपनी की फ़ाइनेंशियल ईयर 30 तक अपने EBITDA को तीन गुना करने की योजना है. क्या ये एक सही निवेश है?AI-generated image

मौजूदा बाज़ार में सबसे महंगा मिड-कैप फ़ार्मा स्टॉक पिरामल फ़ार्मा अपने हालिया ग्रोथ गाइडेंस के साथ दलाल स्ट्रीट में सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. कंपनी ने कहा कि वो फ़ाइनेंशियल ईयर 30 तक अपने रेवेन्यू को दोगुना और अपने EBITDA (इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोरटाइज़ेशन से पहले की इनकम) को तिगुना करके क्रमशः करीब ₹16,000 करोड़ और ₹3,600 करोड़ कर लेगी, जो अगले छह सालों में क्रमशः 12 और 20 फ़ीसदी प्रति वर्ष की बढ़ोतरी के बराबर है.

इन्वेस्टर्स मेनेजमेंट के भरोसे से सहमत हैं. पिछले साल की तुलना में शेयर की क़ीमत दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है. जून 2024 में समाप्त 12 महीनों के लिए ₹28 करोड़ के मामूली मुनाफ़े (सामान्य से ज़्यादा टैक्स देनदारी के कारण) के बावजूद इसका मार्केट कैप ₹30,000 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है. इसके चलते 30 सितंबर, 2024 को कंपनी का P/E रेशियो 1,082 हो गया. ऐसे में, ये सवाल उठना वाजिब है कि क्या ये उत्साह वाकई में सही है. हम इस स्टोरी में इसी सवाल का जवाब खोज रहे हैं. लेकिन सबसे पहले उसकी ग्रोथ की स्ट्रैटजी को समझते हैं, जिस पर कंपनी दांव लगा रही है:

गेम प्लान

कंपनी की अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग या CDMO वर्टिकल पर ख़र्च दोगुना करने की योजना है, जिससे उसको 58 फ़ीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे ज़्यादा रेवेन्यू मिलता है. CDMO रेवेन्यू का करीब आधा हिस्सा एक्सपेरिमेंट से जुड़े बिज़नस से आता है, जिसमें रिसर्च से लेकर डेवलपमेंट और प्रीक्लिनिकल ट्रायल शामिल हैं. ये नए प्रोडक्ट के डेवलपमेंट में इसकी विशेषज्ञता को दिखाता है. इस तरह, इसका जोर ख़ासकर अपने बायोफ़ार्मा क्लाइंट्स के लिए ख़ास तरह के प्रोडक्ट विकसित करने पर है, जिनमें मार्जिन ख़ासा ज़्यादा होता है.

CDMO के अलावा, कंपनी अमेरिका और यूरोप में अपने दूसरे वर्टिकल-ऑफ-पेटेंट जेनेरिक प्रोडक्ट का तेज़ी से विस्तार कर रही है. आखिरी वर्टिकल कंज्यूमर हेल्थकेयर सेगमेंट है. पिरामल अपने कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क और ब्रांड विज़िबिलिटी को बढ़ाने के लिए काम कर रही है.

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चुनौतियां

लेकिन कंपनी के सामने कई बाधाएं हैं और इसके ग्रोथ प्लान पर अमल करना उतना आसान नहीं है:

बोझिल प्रक्रिया: नई दवा के विकास में समय लगता है और उसे सख्त नियमों का पालन करना होता है. इसके लिए डोमेन स्पेशियलिटी और भारी निवेश की ज़रूरत होती है. भले ही, बायोफ़ार्मा कंपनियां तेज़ी से बढ़ रही हैं, लेकिन बहुत कम ही व्यावसायिक रूप से प्रोडक्ट लॉन्च करने में कामयाब हो पाती हैं. इसकी मुख्य वजह ये है कि उनकी कामयाबी पूरी तरह से क्लिनिकल ट्रायल और कारोबार के लिहाज़ से उनकी व्यवहार्यता पर निर्भर करती है. इन फ़ैक्टर्स के चलते आम तौर पर दवाओं को व्यावसायिक रूप से बाज़ार में उतारने में लंबा समय लग जाता है. इस तरह मुनाफ़ा हासिल करना अक्सर एक दूर का सपना होता है.

बढ़ा हुआ क़र्ज़: कंपनी का बड़ा आकार पिछले कुछ सालों में आक्रामक इनॉर्गैनिक ग्रोथ का नतीजा है. इसने पिछले 10 साल में 15 एक्विजिशन किए हैं (जिसमें डीमर्जर से पहले की अवधि भी शामिल है). मैनेजमेंट इनॉर्गैनिक ग्रोथ की स्ट्रैटजी पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है. लेकिन ये कंपनी के लिए अच्छा संकेत नहीं है, जिसके खातों में पहले से ही 4,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज़ है. ऊंची वर्किंग कैपिटल से जुड़ी ज़रूरतों से भी चिंता बढ़ी है और इसका कैश कन्वर्जन साइकल क़रीब 180 दिनों का है.

बहुत ज़्यादा है वैल्यूएशन

भले ही पिरामल अगले छह सालों में अपने EBITDA को तीन गुना करने में कामयाब हो जाए, लेकिन इसका मौजूदा वैल्यूएशन कहीं से उचित नहीं है. हमने आगे इसे ज़्यादा स्पष्ट करने की कोशिश की है:

₹241 करोड़ के प्रॉफ़िट बिफोर टैक्स (जून 2024 को ख़त्म होने वाले 12 महीनों के लिए) को इनकम से बदलने पर, इसका वर्तमान P/E रेशियो 125 गुना हो जाता है. ये मानते हुए कि कंपनी FY 30 तक प्रॉफ़िट बिफ़ोर टैक्स को तीन गुना बढ़ाकर ₹723 करोड़ करने में कामयाब हो जाती है तो इस आंकड़े के आधार पर आगे का P/E 42 गुना हो जाता है. ये अभी भी सिप्ला (31 गुना) और डॉ. रेड्डीज़ (20 गुना) जैसी दिग्गज कंपनियों के मौजूदा P/E मल्टीपल्स से ज़्यादा है.

इस प्रकार, भले ही पीरामल के लिए इनकम की संभावनाएं उज्ज्वल हैं, तब भी शेयर में तेज़ी से सुरक्षा का बहुत कम मार्जिन रह जाता है. रेग्यूलेट्री रिस्क से आसानी से खेल बिगड़ने की आशंकाओं को देखें तो इस बेहद चर्चित स्टॉक के लिए बहुत ज़्यादा पैसे ख़र्च करना समझदारी नहीं होगी.

डिस्क्लेमर: ये स्टॉक रिकमंडेशन नहीं है. निवेश का फ़ैसला लेने से पहले कृपया ख़ुद जांच पड़ताल कर लें.

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